विज्ञान ने सुलझाई पहेली, मृत्‍यु से पहले शरीर में दिखते हैं कौन-कौन से लक्षण, आसानी से हो सकती है पहचान

मृत्यु के लक्षण: किसी की मृत्‍यु के सही समय की भविष्‍यवाणी कर पाना निश्चित तौर पर काफी मुश्किल होता है. हालांकि, इंसानी शरीर कुछ समय पहले से ही मौत के संकेत देना शुरू कर देता है. किसी के शरीर में हो रहे बदलावों को अगर ध्‍यान से देखकर लक्षण पहचान लिए जाएं तो पता किया जा सकता है कि उसकी मौत होने वाली है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, मृत्‍यु के नजदीक पहुंच चुके व्‍यक्ति के शरीर, त्‍वचा, आंखों और श्‍वसन तंत्र में बदलाव होते हैं. इनमें कुछ इतने साफ-साफ दिखते हैं कि आसानी से मौत के समय का पता चल जाता है. फिर भी ये बताना नामुमकिन ही होता है कि मृत्‍यु का समय कब होगा?

शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर किसी व्‍यक्ति की मौत होने वाली है तो वह आंखों को ज्‍यादा समय के लिए बंद करने लगता है. कई बार उनकी आंखें आधी खुली रहती हैं. साथ ही चेहरे की मांसपेशियां काफी रिलेक्‍स नजर आने लगती हैं. जबड़ा ज्‍यादातर समय हल्‍का खुला हुआ रहता है. त्‍वचा धीरे-धीरे पीली पड़नी शुरू हो जाती है. सांस चलने की गति में बदलाव आ जाता है. मृत्‍यु के नजदीक पहुंच चुके लोग सांस लेते समय ज्‍यादा आवाज करते हैं. वहीं, कुछ लोगों में बिना आवाज की धीमी सांस लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.

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क्‍या हैं मृत्‍यु के बहुत करीब होने के लक्षण
अगर कोई व्‍यक्ति मौत के बहुत करीब पहुंच गया है तो वो सांस लेना बहुत कम कर देता है. ऐसे लोग रुक-रुक कर ही सांस लेते हैं. कई बार ऐसा लगता है, जैसे उन्‍होंने एक बार सांस लेने के बाद कुछ देर तक सांस ली ही नहीं. कुछ लोगों के सांस लेने और छोड़ने के बीच अंतराल इतना बढ़ जाता है कि बार-बार ऐसा लगता है, जैसे उनकी मृत्‍यु हो गई. बिलकुल आखिरी समय में लोग एक मिनट में दो या तीन बार ही सांस लेते हैं. सांस हमेशा के लिए रुकने से पहले कुछ समय तक हर आती और जाती सांस के अंतराल के कारण ऐसा लगता है कि सब खत्‍म हो चुका है.

कुछ लोगों के मृत्‍यु के नजदीक पहुंचने पर सांस लेने के बीच अंतराल इतना बढ़ जाता है कि हर बार करीबियों को लगता है, जैसे सब खत्‍म हो गया.

क्‍या सभी को होता है एक जैसा अनुभव?
अब सवाल उठता है कि क्‍या हर व्‍यक्ति को मौत के समय एक जैसा अनुभव होता है. इस पर शोधकर्ता कहते हैं कि कुछ लोगों के लिए मृत्यु का पल बहुत कष्‍ट देता है. हो सकता है कि वह किसी से बात करना चाहते हों या परिवार व मित्रों से बात करना चाहते हों. कुछ लोग आखिरी समय में बिलकुल अकेला रहना चाहते हैं. कुछ लोग बहुत ज्‍यादा उदास महसूस करते हैं. आसपास के लोग ये भी सोच भी नहीं सकते कि मरने वाला व्‍यक्ति क्‍या महसूस कर रहा है. मौत का क्षण मरने वाले व्‍यक्ति को अचंभित कर देता है. शोधकर्ता कहते हैं कि हर व्यक्ति के मरने, उस वक्‍त के शोक और उदासी का अनुभव अलग होता है.

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स्‍वाभाविक है करीबियों का दुखी होना
किसी के मरने के बाद उसके करीबियों का दुखी होना शत-प्रतिशत स्‍वाभाविक प्रतिक्रिया है. किसी की मृत्‍यु पर दुखी होना, रोना या आंसू छलक पड़ना बहुत ही अहम बात है. कुछ लोगों के लिए यह पल भावनाओं का बेहद दर्दभरा हो सकता है. हर करीबी भी इसे अलग तरह से महसूस कर सकता है. जब तक इस कष्‍ट से कोई पूरी तरह से बाहर नहीं निकल जाता, तब तक दुखी होने या आंसू निकलना स्‍वाभाविक है. इसे बिलकुल नहीं रोकना चाहिए. अक्सर करीबी व्‍यक्ति के मरने के तत्‍काल बाद की भावनाएं बेहद दर्दनाक होती हैं. भावनात्मक दर्द के अलावा करीबियों में शारीरिक प्रतिक्रियाएं भी होती हैं. इनमें ऐसी प्रतिक्रियाएं भी शामिल होती हैं, जो पहले कभी ना हुई हों.

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किसी की मृत्‍यु पर कुछ करीबियों में भावनात्‍मक के साथ कुछ अप्रत्‍याशित शारीरिक प्रतिक्रियाएं भी होती हैं.

कुछ करीबियों को उबरने में लगता है वक्‍त
कुछ लोग बहुत जल्‍द करीबी की मौत के दुख से उबरना शुरू कर देते हैं. वहीं, कुछ को इसमें कुछ वक्‍त लग सकता है. जो लोग जितना जल्‍दी अपने करीबी की मौत को स्‍वीकार कर पाते हैं, वे उतनी ही जल्‍दी दुख से उबर पाते हैं. अलग-अलग लोगों को सामान्‍य जीवन में लौटने के लिए अलग-अलग समय पर तैयार होने जैसा महसूस होता है. इसका मतलब ये कतई नहीं होता कि जल्‍द सामान्‍य जीवन में लौटने वाले लोग मरने वाले को भूल गए हैं. दरअसल, ऐसे लोग अपने परिजन की मृत्‍यु को दूसरों के मुकाबले जल्‍दी स्‍वीकार कर लेते हैं. हालांकि, कुछ लोगों को उबरने में कुछ महीने लग सकते हैं. ऐसे लोगों को ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों से घुलना मिलना चाहिए.

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