ये 3 आयुर्वेदिक हर्ब्स खतरनाक यूरिक एसिड को कर देंगे फ्लश आउट, गठिया के दर्द से मिलेगी निजात, अंग्रेजी दवा से ज्यादा सस्ता

हाइलाइट्स

आयुर्वेद में कई ऐसे हर्ब्स हैं जिनसे यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकाला जा सकता है.
गठिया के दर्द में करेला का सेवन फायदेमंद होता है. करेला शरीर में वात्त दोष को कम करता है

यूरिक एसिड के लिए आयुर्वेद जड़ी-बूटियाँ: शरीर में यदि यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाए तो इसे हाइपरयूरीसेमिया कहते हैं. इससे गठिया की बीमारी होती है. गठिया की बीमारी में जोड़ों में बेपनाह दर्द होता है. जैसे ही यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ती है जोड़ों का दर्द और तेज होता जाता है. यह इंफ्लामेटरी अर्थराइटिस में बदल जाता है. यूरिक एसिड जोड़ों के पास जाकर कार्टिलेज की जगह क्रिस्टल बनने लगता है. जोड़ों के दर्द के लिए लोग कई तरह के इलाज करते हैं. अंग्रेजी दवाइयों से कई तरह के साइड इफेक्ट भी होते हैं. लेकिन अगर आयुर्वेद से इसका इलाज किया जाए तो इससे कोई साइड इफेक्ट नहीं होता. आयुर्वेद में कई ऐसे हर्ब्स हैं जिनसे यूरिक एसिड को शरीर से फ्लश आउट किया जा सकता है. आइए जानते हैं कि कौन से ऐसे नेचुरल हर्ब्स हैं जिनसे गठिया के दर्द से राहत पाई जा सकती है.

गठिया के दर्द में रामबाण आयुर्वेदिक हर्ब्स

1. त्रिफला-हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक त्रिफला से गठिया के दर्द को दूर किया जा सकता है. त्रिफला में तीन तरह के फल होते हैं बिभीतक (बहेड़ा) अमलकी (आंवला) और हरितकी (हरड़). आयुर्वेद के मुताबिक ये तीनों शरीर के तीनों दोष को मिटाते हैं. त्रिफला एंटी-इंफ्लामेटरी होता है जो जोड़ों से सूजन को कम करता है.

3. गिलोय-गिलोय में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होता है यह बात कई रिसर्च में प्रमाणित हो चुका है. पबमेड सेंट्रल जर्नल में छपे एक अध्ययन के मुताबिक गिलोय से निकाले गए जूस से शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बहुत कम हो जाती है. गिलोय में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण भी होता है जिसके कारण यह दर्द को भी कम करता है.

3. नीम-नीम को आमतौर पर लोग स्किन की बीमारी में इस्तेमाल करते हैं लेकिन आयुर्वेद में नीम से गठिया के दर्द का भी इलाज किया जाता है. इसके लिए आप नीम को पीस लीजिए और इसे दर्द वाली जगह पर लगाएं. नीम सीधे सूजन पर हमला करता है और दर्द से राहत दिलाता है.

4. करेला-गठिया के दर्द में करेला का सेवन फायदेमंद होता है. करेला शरीर में वात्त दोष को कम करता है. इसलिए आयुर्वेद में गठिया होने पर करेले का सेवन करने की सलाह दी जाती है. अध्ययन में भी यह साबित हो चुका है कि करेला शरीर में यूरिक एसिड को कम करता है.

5. हल्दी-हल्दी सिर्फ मसाल भर नहीं है. आयुर्वेद में हल्दी से कई बीमारियों का इलाज किया जाता है. हल्दी में मौजूद करक्यूमिन कंपाउड कई बीमारियों में रामबाण है. पबमेड सेंट्रल जर्नल में छपी एक स्टडी के मुताबिक हल्दी ज्वाइंट अर्थराइटिस के लक्षण को कम करती है.

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