‘INDIA’ के सामने बड़ी चुनौती: 2019 में एक-दूसरे के खिलाफ लड़े, अब कैसे करेंगे इन सीटों पर समझौता?

अनिंदया बनर्जी की रिपोर्ट

बेंगलुरु. बेंगलुरु में विपक्षी दलों की बैठक में बीजेपी और मोदी सरकार को सत्ता से हटाने को लेकर एकजुटता पर बल दिया गया. 6 दलों ने एक साथ खड़े होकर अपनी एकजुटता को नया नाम दिया और कहा कि “हम एकजुट खड़े हैं.” इसमें वह नेता भी जो इसके पहले एक दूसरे के खिलाफ खुलकर बयान देते थे वह एक साथ खड़े दिखे. इनमें आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, जिन्होंने 2013 में भारतीय जनता पार्टी या कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करने की कसम खाई थी उन्हें कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ मुस्कुराते हुए देखा गया.

कांग्रेस के राहुल गांधी, जिनकी पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस पर पश्चिम बंगाल में अपने कार्यकर्ताओं पर हिंसा करने का आरोप लगाया है उन्हें टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी के साथ गहरी बातचीत करते हुए देखा गया. इस बात पर जोर दिया गया कि बड़ी तस्वीर राष्ट्रीय स्तर पर एक एकीकृत मोर्चे तक पहुंच रही थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि भारत की इन पार्टियों ने वास्तव में एक-दूसरे के बीच जी-जान से लड़ाई लड़ी.

इन सीटों पर एक दूसरे के खिलाफ भिड़े थे दल
देश भर में 246 ऐसी संसदीय सीटें हैं, जहां पिछले आम चुनाव में कम से कम दो राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ लड़ी थीं. 107 ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां तीन दलों ने 2019 में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था. 19 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां पिछली बार ऐसी कम से कम चार पार्टियां चुनाव में भिड़ गई थीं और तीन ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां कम से कम पांच राजनीतिक संगठन जो अब ‘एकजुट’ भारत का हिस्सा हैं वह 2019 में एक-दूसरे के बीच लड़े.

सीटों पर समझौते पर फंसेगा पेंच
हालांकि आंकड़ों में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के हारने वाले उम्मीदवारों की चुनावी लड़ाई अलग थी है. 267 ऐसी सीटें हैं जहां इनमें से किसी भी पार्टी ने एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा. अब, गठबंधन के नामकरण का शुरुआती चरण पूरा हो गया है और विपक्ष एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो देखना दिलचस्प होगा वह है सीट-बंटवारे का समझौता कैसा होता है.

क्या कहते हैं 2019 के आंकड़े?
2019 के आंकड़ों से पता चलता है कि इनमें से कोई भी पार्टी 2019 में उन क्षेत्रों से जमीन छोड़ने को तैयार नहीं होगी, जो उन्होंने लड़े थे, भले ही असफल रहे हों. यह इसलिए क्योंकि उनके पास वहां एक संगठन और कैडर आधार है. 2019 में भाजपा ने 37.7% वोट शेयर के साथ 303 सीटें जीतीं और सरकार बनाई, जबकि कांग्रेस सिर्फ 52 सीटें हासिल करने में कामयाब रही. दो 10% वोट शेयर से थोड़ा कम हासिल हुआ. इसके बाद द्रमुक और तृणमूल कांग्रेस का स्थान रहा.

टैग: Arvind kejriwal, लोकसभा चुनाव 2024, ममता बनर्जी, Rahul gandhi

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