वो गीतकार जिसने आंखों ने नहीं देखा कोई रंग, कलम से दुनिया को किया रंगीन, भजन गाते-गाते हुई बॉलीवुड में एंट्री

नई दिल्ली. दुनिया को देखने के लिए हमें दो आंखें मिली है, जिससे हम हर रंग को देख सकते हैं. इंसान के इशारों से उनसे हाव-भाव को पहचान सकते हैं. बिना आंखों के जिंदगी कैसी होगी? ये सोचकर भी रूह कपकपा जाती . लेकिन क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड को एक ऐसे गीतकार का साथ मिला, जिन्होंने अपनी आंखों से तो कई रंग नहीं देखा लेकिन अपनी कलम और संगीत से दुनिया को रंगीन कर दिया. अब तक तो शायद आप समझ गए होंगे कि हम किसी बात कर रहे हैं. बात हो रही है पद्मश्री पुरस्‍कार से सम्मानित रवींद्र जैन की…

रविंद्र जैन बॉलीवुड के वो गीतकार और संगीतकार हैं, जिन्होंने भजन हो या हिंदी सिनेमा को प्रेम गीत, उन्होंने अपनी सुरीली आवाज देकर उन्हें अमर कर लिया. रामानंद सागर की ‘रामायण’ को अपनी दमदार आवाज और कंपोजिशन से ही उन्होंने लोकप्रिय बनाया. क्या आप जानते हैं कैसे उनकी बॉलीवुड में एंट्री हुई और कैसे उन्होंने अपने गानों से लोगों के दिलों पर राज कर लिया.

पैदाइशी नेत्रहीन थे रविंद्र जैन
‘रामायण’ की शुरुआत में ऊंचे सुर में ‘मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सो दसरथ अजिर बिहारी’ सुनाई देता है, यह आवाज उन्‍हीं रविंद्र जैन की है, जिन्‍होंने चौपाइयों से रामायण को लोगों के दिलों में बिठा दिया. वो रविंद्र जो पैदाइशी नेत्रहीन थे. 28 फरवरी 1944 में उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुआ था. वह सात भाई बहनों में अपनी माता-पिता की तीसरी संतान थे. उनके पिता ईन्द्रमणी जैन संस्कृत के बड़े पंडित और आयुर्वेदाचार्य थे और माता का नाम किरन जैन था.

‘तन के हिस्से में सिर्फ दो आंखें हैं और मन…’
जन्म से आंखों में रोशनी न होने के बाद भी उन्‍होंने हिम्‍मत नहीं हारी. उन्‍होंने अपनी आंखों का इलाज भी इसलिए नहीं कराया कि कहीं उनका गाने और लिखने से फोकस न हट जाए. ये दुनिया कितनी खूबसूरत है, उसका अहसास आंखों की बजाय अपने मन से करने वाले रविंद्र जैन की कलम से दिल को सुकून देने वाले गीत निकले. एक बार उनसे सवाल किया गया कि क्या उनका नेत्रहीन होना फिल्म उद्योग में उनके काम में बाधा डालती है? जिसके जवाब में रवीन्द्र ने जवाब दिया ‘तन के हिस्से में सिर्फ दो आंखें हैं, मन की आंखें हजार होती हैं.’

सदाबहार गानों को दी आवाज
साल 1972 में उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की. बॉलीवुड का सफर शुरू करने से पहले जैन भजन गाते थे. ‘अंखियों के झरोखों से, मैंने देखा जो सांवरे’ गीत के बोल उन्होंने खुद लिखे. इस गाने को जानी-मानी गायिका हेमलता ने आवाज दी थी और ये गाना सदाबाहर गीत बन गया. रविंद्र जैन ने 1973 में आई अभिनेता शशि कपूर और मुमताज की फ‍िल्‍म ‘चोर मचाए शोर’ के लिए गीत लिखा, ‘ले जाएंगे, ले जाएंगे, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’. इस गाने को किशोर कुमार और आशा भोसले ने आवाज दी थी. यह गाना बेहद जबरदस्‍त हिट हुआ था.

पद्मश्री पुरस्‍कार से सम्मानित हैं रविंद्र जैन
रविंद्र जैन को हिंदी सिनेमा और संगीत में विशेष योगदान के लिए साल 2015 में भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्‍कार से नवाजा गया है, वहीं, ‘राम तेरी गंगा मैली’ फ‍िल्‍म के ल‍िए उन्‍हें सर्वश्रेष्‍ठ संगीत निर्देशक का फ‍िल्‍मफेयर पुरस्‍कार मिला था. इसके अलावा उन्हें कई फिल्म अन्य प्रतिष्ठित पुरस्‍कार हासिल हुए हैं. आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके नगमे हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे.

रविंद्र जैन के लोकप्रिय गीत
गीत गाता चल, ओ साथी गुनगुनाता चल- फिल्म- गीत गाता चल
जब दीप जले आना- फिल्म- चितचोर
ले तो आए हो हमें सपनों के गांव में- फिल्म 1977- दुल्हन वही जो पिया मन भाए
ठंडे-ठंडे पानी से नहाना चाहिए- फिल्म 1978- पति, पत्नी और वो
एक राधा एक मीरा- फिल्म 1985-राम तेरी गंगा मैली
अंखियों के झरोखों से, मैंने जो देखा सांवरे- फिल्म1978- अंखियों के झरोखों से
सजना है मुझे सजना के लिए- फिल्म 1973- सौदागर
हर हसीं चीज का मैं तलबगार हूं- फिल्म 1973- सौदागर
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम- फिल्म 1975- गीत गाता चल
कौन दिशा में लेके-फिल्म 1982 नदिया के पार
सुन सायबा सुन, प्यार की धुन- फिल्म 1985- राम तेरी गंगा मैली
मुझे हक है- फिल्म 2006- विवाह. रविंद्र जैन इन गीतों से बॉलीवुड को समृद्ध बनाया है.

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