क्योंकि आंकड़े झूठ नहीं बोलते: NDA को हराने के लिए INDIA को अभी तय करनी है बहुत लंबी दूरी, 2019 के नतीजों से समझें

(रिपोर्ट: अनिंदया बनर्जी)

नई दिल्ली: विपक्ष ने अपने गठबंधन का नाम I.N.D.I.A (Indian National Developmental Inclusive Allianc) रखा है. लेकिन संक्षिप्ताक्षरों और अलंकारों से परे, जो चीज मायने रखता है वह है हार्ड डेटा. विपक्षी दलों की दो बड़ी बैठकों के बाद छिड़े I.N.D.I.A vs NDA नरेटिव के बीच, अब 2019 के लोकसभा चुनावों के कुछ आंकड़ों पर नजर डालने का समय आ गया है. क्या बहुप्रचारित विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A, भाजपा नीत गठबंधन एनडीए से अपनी वोट शेयर का गैप भर पाएगा? यह इतना आसान नहीं लगता. News18 ने 2019 लोकसभा चुनाव की ऐसी सीटों का विश्लेषण किया, जहां दोनों पक्षों ने 50 प्रतिशत वोटों के साथ जीत दर्ज की. दूसरे शब्दों में, यह एक निर्णायक जीत का संकेत होना चाहिए.

इसके अनुसार, एनडीए ने 241 ऐसी संसदीय सीटें जीतीं, जबकि I.N.D.I.A ने सिर्फ 68 सीटें जीतीं. अब 2024 के आम चुनावों में विपक्षी गठबंधन को 173 सीटों के अंतर को पाटने की जरूरत है. 2019 के डेटा के अनुसार 70 प्रतिशत से अधिक वोट पाने वाले विजेताओं के संदर्भ में, जिसका मतलब जोरदार जीत होना चाहिए, एनडीए के पास 5 सीटें थीं, जबकि I.N.D.I.A को 1 भी सीट पर 70 फीसदी वोटा नहीं मिले. अगर 35 प्रतिशत से 40 प्रतिशत वोट पाकर जीत दर्ज करने की बात आती है, तो यहां विपक्षी गठबंधन एनडीए से आगे है. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवारों ने 35 से 40 फीसदी वोट पाकर 88 सीटें जीतीं, जबकि एनडीए के उम्मीदवारों ने ऐसी 35 सीटें जीतीं. हालांकि, 53 का यह अंतर 173 के अंतर से कम है.

साल 2019 में जमानत जब्त होने वालों में I.N.D.I.A के सर्वाधिक उम्मीदवार
किसी चुनाव में जमानत खोना न केवल उम्मीदवारों के लिए, बल्कि उस राजनीतिक दल के लिए भी एक बड़ी क्षति है, जिसके टिकट पर वह चुनावी मैदान में उतरा था. लोकसभा चुनाव में सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को निर्वाचन आयोग के पास 25000 रुपये की जमानत राशि जमा करानी होती है. वहीं, एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह रकम 12,500 रुपए होती है. निर्वाचन आयोग के मुताबिक, जब कोई उम्मीदवार अपने निर्वाचन क्षेत्र में पड़े कुल वोटों का 1/6 यानी 16.66% वोट हासिल नहीं कर पाता तो उसकी जमानत जब्त कर ली जाती है.

हम यदि 2019 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के की बात करें तो, I.N.D.I.A के 422 ऐसे उम्मीदवार थे, जिनकी जमानत जब्त हुई. वहीं एनडीए के 130 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई. यह एक ऐसी श्रेणी है जहां संख्या जितनी कम हो, राजनीतिक दलों के लिए उतना अच्छा रहता है. इस हिसाब से 2019 में एनडीए के मुकाबले I.N.D.I.A के 292 ज्यादा उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई. यह अंतर भाजपा नीत गठबंधन के फायदे में है. लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस डेटा में एनसीपी और शिवसेना के हारने वाले उम्मीदवारों को शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि उनकी वर्तमान स्थिति अभी तक ज्ञात नहीं है.

बहुत कम अंतर से जीत वाली सीटें
जहां तक ​​इस डेटा का सवाल है, एनडीए और I.N.D.I.A दोनों लगभग बराबर हैं. जब ऐसी सीटों की बात करते हैं, जहां जीत का अंतर 2 प्रतिशत वोट शेयर से कम था, तो 2019 में एनडीए की ऐसी 10 और I.N.D.I.A की 9 सीटें थीं. वहीं 5 प्रतिशत वोट शेयर से कम जीत के अंतर वाली सीटों की बात आती है, तो एनडीए ने ऐसी 24 सीटें जीतीं, जबकि I.N.D.I.A ने 15 सीटें जीतीं. सीधे शब्दों में कहें तो, यह उतार-चढ़ाव इन 58 सीटों को अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में किसी के भी पाले में डाल सकता है.

जब महिला उम्मीदवारों की बात आती है तो दोनों बराबर हैं
महिलाओं को टिकट देने के मामले में दोनों गठबंधनों का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा. 2019 में जहां एनडीए में 11.09 प्रतिशत महिला उम्मीदवार थीं, वहीं I.N.D.I.A बैनर वाली पार्टियों ने 13.24 प्रतिशत महिलाओं को टिकट दिया. लेकिन, इस डेटा में एनसीपी और शिवसेना के एक बार फिर हारने वाले उम्मीदवार शामिल नहीं हैं. इस बीच, एनडीए की कुल महिला उम्मीदवारों में से 13.51 प्रतिशत को जीत मिली थी, जबकि I.N.D.I.A के लिए यह आंकड़ा 13.28 प्रतिशत था- यानी दोनों गठबंधनों के बीच इस मोर्चे पर बहुत कम अंतर था.

जब नौजवानों की बात आती है तो यहां I.N.D.I.A बेहतर
अगर युवाओं को मौका देने की बात आती है, तो 2019 के लोकसभा आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए I.N.D.I.A, एनडीए से थोड़ा बेहतर है. विपक्षी गठबंधन में 40 वर्ष से कम उम्र के 20.4 प्रतिशत उम्मीदवार थे, जबकि एनडीए के पास इसी श्रेणी में 11.26 प्रतिशत उम्मीदवार थे. इसी तरह, जब उम्रदराज लोगों को टिकट देने की बात आती है, तो I.N.D.I.A ने एनडीए के मुकाबले ऐसे अधिक उम्मीदवारों को तरजीह दी. I.N.D.I.A में शामिल दलों के 8.87 प्रतिशत उम्मीदवार 70 साल से अधिक उम्र के थे. एनडीए की बात करें तो इस श्रेणी में उसके 2.56 प्रतिशत उम्मीदवार थे. इस डेटा में एक बार फिर एनसीपी और शिवसेना के हारने वाले उम्मीदवारों को शामिल नहीं किया गया है.

जब चुनावों में प्रदर्शन की बात आती है, तो उम्र या जनसांख्यिकी से संबंधित डेटा का मतदान प्रतिशत और जीत के अंतर के बराबर महत्व नहीं होता है, और इस मामले में एनडीए विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A से कहीं आगे है. उदाहरण के लिए, जब 50 प्रतिशत वोट प्राप्त करने वाले विजेताओं की बात आती है तो I.N.D.I.A को एनडीए की बराबरी करने के लिए 173 सीटों के भारी अंतर को पाटने की जरूरत है, और यह निश्चित रूप से एक आसान काम नहीं है, क्योंकि चुनाव में अब एक साल से भी कम समय बचा है. वैसे तो राजनीति में एक सप्ताह भी बहुत लंबा समय होता है; लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि I.N.D.I.A की तुलना में एनडीए कहीं अधिक नियंत्रण में है. I.N.D.I.A को लक्ष्य तो पता है, लेकिन वहां तक ​​कैसे पहुंचा जाए, इसके बारे में वह बेखबर है.

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