गोपालदास नीरज पुण्यतिथि: कुछ सांसों के रुक जाने से ‘नीरज’ नहीं मरा करता है- डॉ. प्रवीण शुक्ल

गोपालदास नीरज की जयंती: गीत-ग़ज़लों के राजकुमार गोपालदास नीरज की आज पुण्यतिथि है. दिल की कलम से पाती लिखकर हर दिल पर राज करने वाले दद्दू को उनकी पुण्यतिथि पर उनके चाहने वाले अपने-अपने तरीके से उन्हें याद कर रहे हैं. प्रसिद्ध हास्य और ओज के कवि डॉ. प्रवीण शुक्ल नीरज को उन्हीं की कविता के माध्यम से याद कर रहे हैं.

दद्दा नीरज का एक गीत बहुत ही लोकप्रिय हुआ है- “कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है”. इस गीत में प्रवीण शुक्ल ने अपने तरीके से बदलाव करके लिखा है- “कुछ सांसों के रुक जाने से ‘नीरज’ नहीं मरा करता है”. प्रस्तुत हैं गोपालदास नीरज के प्रति प्रवीण शुक्ल के श्रद्धासुमन-

नीरज नहीं मरा करता है!

छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ लुटाने वालों,
कुछ सांसों के रुक जाने से ‘नीरज’ नहीं मरा करता है।

अद्भुत शब्द-साधना  करके,
दुनिया भर में  नाम कमाया
इतनी  ख़ुश्बू  फैली  जग में
पूरी  दुनिया    ने    दुलराया
वो  सबके  दिल  में रहते थे,
वो  हरपल  यह  ही कहते थे,
इस प्यासी तपती धरती को आंसू हरा-भरा करता है
कुछ सांसों के रुक जाने से नीरज नहीं मरा करता है।

स्वर  तो मौन हुआ है  बेशक
पर  धुन  अब भी गूंज रही है
गीत भवन में काव्य-कामिनी
अपना  प्रियतम  ढूंढ़  रही  है
वो  लगते  थे  बड़े  अलग  से,
कहते  थे  वो  सारे  जग    से,
बूंद-बूंद  रस  के  झरने  से पूरा  घड़ा भरा करता है
कुछ सांसों के रुक जाने से नीरज नहीं मरा करता है।

इस दुनिया से  नज़र मिलाकर
एक  गीत  मैं  और  सुना    लूं
दुनिया  का  गम जितना गाया
एक  बार  फिर   से  दोहरा लूं
जीवन  की  हर  रीत   निभाई,
आंसू  के   संग   करी   सगाई,
पीड़ा  जिसकी रही  सखी वो, दुख से नहीं डरा करता है
कुछ सांसों के रुक जाने से, नीरज नहीं मरा करता   है।

अस्सी बरस जिया कविता को
एक   अनोखी  सीख   दे   गए
सर्वधर्म,   सद्भाव,      समर्पण
वाली  जग   को  लीक  दे  गए
मर्म   सभी   धर्मों   का    छाना,
जिसने   तत्व-ज्ञान   को  जाना,
उसकी जग में जगह कभी  भी  कोई नहीं भरा करता है
कुछ सांसों के रुक जाने से नीरज नहीं मरा करता है।

गोपालदास नीरज की यह गीत “कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है” काफी प्रसिद्ध है और कई राज्यों की पाठ्य पुस्तकों में यह गीत शामिल है. इस कविता के माध्यम से नीरज जी ने असफलता से निराश नहीं होने का संदेश दिया है. यह कविता जीवन में ऊर्जा का संचार करती है. प्रस्तुत है नीरज जी की यह कविता-

छिप छिप अश्रु बहाने वालों,
मोती व्यर्थ लुटाने वालों
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।
सपना क्या है, नयन सेज पर
सोया हुया आंख का पानी
और टूटना है उसको ज्यों
जागे कच्ची नींद जवानी
गीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालों
कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है।
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।

माला विखर गई तो क्या है,
खुद ही हल हो गयी समस्या
आंसू गर नीलाम हुये तो
समझो पूरी हुई तपस्या
रूठे दिवस मनाने वालों, फटी कमीज सिलाने वाले
कुछ दीपक के बुझ जाने से आंगन नहीं मरा करता है।
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।

खोता कुछ भी नहीं यहां पर
केवल जिल्द बदलती पोथी
जैसे रात उतार चांदनी
पहने सुबह धूप की धोती
वस्त्र बदलकर आने वाले, चाल बदलकर जाने वालों
चंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।

लाखों बार गगरिया फूटी
शिकन न आयी पर पनघट पर
लाखों बार किश्तियां डूबीं
चहल पहल वो ही है घाट पर
तम की उमर बढ़ाने वालों लौ की उमर घटाने वालों
लाख करे पतझड़ कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।

लूट लिया माली ने उपवन
लूटी न लेकिन गन्ध फूल की
तूफानों तक ने छेड़ा पर
खिड़की बन्द न हुई धूल की
नफरत गले लगाने वालों, सब पर धूल उड़ाने वालों
कुछ मुखड़ों की नाराजी से दर्पण नहीं मरा करता है।
कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।

इस कविता के माध्यम से महान कवि और गीतकार गोपालदास नीरज कहते हैं कि यदि हमारा कोई सपना पूरा नहीं होता है या फिर वह समय से पहले टूट जाता है तो हमें निराश नहीं होना चाहिए. क्योंकि कुछ सपने यदि पूरे नहीं होते हैं तो जीवन समाप्त नहीं हो जाता है.

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