क्या है ‘INDIA’ बनने की कहानी… बेंगलुरु बैठक में विपक्षी गठबंधन ने किस तरह फाइनल किया नाम

बेंगलुरु: 2024 लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों के गठबंधन ने अपने नए नाम की आधिकारिक घोषणा की. मंगलवार को बेंगलुरु में हुई बैठक में मुख्यमंत्रियों ने पंचलाइन और शब्दों की बाजीगरी करते हुए संक्षिप्त नामों पर चर्चा की, जो गठबंधन के अलग नजरिए को प्रस्तुत करें और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का मुकाबला कर सके. इस तरह से जो नाम उभर कर सामने आया, वह है INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लुसिव अलायंस, यानी भारतीय राष्ट्रीय प्रगतिशील संयुक्त गठबंधन).

किसका है तुमको इंतजार हम हैं ना
सूत्रों का कहना है संक्षिप्त नाम सुझाने के मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पहली थीं, उन्होंने विपक्षी दलों के मकसद को व्यक्त करने वाली पंचलाइन दी. “NDA, क्या भारत को चुनौती दे सकते हो? भाजपा, क्या तुम भारत को चुनौती दे सकते हो?, क्या कोई और भारत को चुनौती दे सकता है?  हमें अपनी मातृभूमि से प्यार हैं. हम देशभक्त लोग हैं. हम यहां सिर्फ आपके लिए हैं, हम किसानों, हिंदुओं, मुसलमानों, ईसाई सिखों, दलितों इस देश और दुनिया के लिए हैं… अगर किसी में दम हो तो हमें रोक के दिखाए.”

ममता बनर्जी के समकक्ष दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, जो अगले वक्ता थे, उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके 9 साल के शासन पर हमला बोलते हुए की, “देश के लोगों के लिए बहुत कुछ करने का अवसर था, बावजूद इसके किसी भी क्षेत्र ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. उन्होंने हमारी अर्थव्यवस्था और रेलवे को बरबाद कर दिया, उन्होंने हमारे हवाई जहाज और पानी के जहाज बेच डाले.” मोदी सरकार की असफलता को गिनाते हुए उन्होंने बताया कि आखिर क्यों 2024 के चुनाव में INDIA की जरूरत है.

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इसके बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकर ने अपनी बात को रखने के लिए और यह बताने के लिए कि वह क्यों INDIA का समर्थन कर रहे हैं, उन्होंनें शाहरुख की फिल्म “मैं हूं ना” का सहारा लेते हुए अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि वे लोग भारत और भारतीयों के लिए लड़ रहे हैं. अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि, बार बार यह सवाल उठ रहे हैं कि अलग-अलग विचारधारा और सोच वाले दल एक साथ एक मंच पर कैसे टिक पाएंगे, यही तो लोकतंत्र की ताकत और खूबसूरती है. कुछ लोगों का सोचना है कि यह एक परिवार की लड़ाई है, अगर इस बात को सच माने तो, यह भी सच है कि भारत ही हमारा परिवार है, और हम हमारे परिवार के लिए लड़ रहे हैं, हमें उसे बचाने की जरूरत है, ठीक वैसे ही जैसे हम आजादी के लिए लड़े थे. हमें यहां भी लड़ना है. ठाकरे ने कहा, “प्रसिद्ध फिल्म मैं हूं ना की तर्ज पर मैं यह कहना चाहूंगा कि “हम हैं ना.”

गठबंधन का नाम तय होने की कहानी
गठबंधन के नाम पर काफी चर्चा होने के बाद देशभर की 26 पार्टियां एक नतीजे पर पहुंची. ऐसा बताया गया है कि INDIA नाम सबसे पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने सुझाया, इसे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के प्रमुख एमके स्टालिन का भी समर्थन मिला, फिर इसमें कुछ बदलाव किए गए. इस तरह पहले INDIA का पूरा नाम  भारतीय राष्ट्रीय जनतांत्रिक संयुक्त गठबंधन (Indian National Democratic Inclusive Alliance) सुझाया गया, लेकिन बाद में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सिफारिश पर, लोकतांत्रिक (Democratic) शब्द को विकासात्मक (developmental) में बदल दिया गया. इसके अलावा भी अन्य दलों के प्रमुख ने अपने सुझाव साझा किए, जैसे  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपना विचार साझा करते हुए N अक्षर को हटाने की बात रखी, उनका मत था कि राष्ट्रीय शब्द की जरूरत नहीं है. इसे केवल (IDIA) भारतीय लोकतांत्रिक समावेशी गठबंधन, कहने से लोग इसे आइडिया यानी विचार के तौर पर लेंगे.

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वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इंडियन मेन फ्रंट या IMF नाम सुझाया. मारुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के महासचिव वाइको ने मतदाताओं के साथ ज्यादा जुड़ाव प्रस्तुत करने के लिए ‘इंडियन पीपुल्स अलायंस’ (IPA) नाम का सुझाव दिया. इसी तरह तमिलनाडु के एक और राजनीतिक दल, विदुथलाई चिरुथिगल काची के संस्थापक थोल थिरुमावलवन, जो बेंगलुरु में बैठक में भी शामिल हुए थे, उन्होंने दो नामों के सुझाव दिए – सेव इंडिया अलायंस या सेक्युलर इंडिया अलायंस. इसी तरह ‘वी फॉर इंडिया’ नाम सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी ने सुझाया, जबकि सीपीआई के डी राजा नेजो नाम सुझाया वह था – ‘सेव डेमोक्रेसी अलायंस’ या महज ‘सेव इंडिया.’

भाजपा के विचार बनाम भारत का विचार
मीडिया से मुखातिब होते हुए राहुल गांधी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नया नाम न केवल विपक्षी दलों के नए मंच के लिए सटीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि “भाजपा किस तरह भारत के विचार पर हमला कर रही है, कैसे  भारत की संपत्ति छीनी जा रही है. भारत को कुछ व्यवसायियों को सौंप दिया, जो प्रधानमंत्री और भाजपा के करीबी हैं.” राहुल गांधी ने कहा, “हमारी लड़ाई कोई दो राजनीतिक गठबंधनों के बीच नहीं है, बल्कि यह लड़ाई भारत के विचार के लिए है. ऐतिहासिक और वैश्विक स्तर पर, कोई भी भारत और भारत के विचार को हराने का माद्दा नहीं रखता है. यह लड़ाई भारत के विचार और भाजपा के विचार के बीच की है. यह भारत और भाजपा के बीच की लड़ाई है. यह भारत और नरेंद्र मोदी के बीच की लड़ाई है.”

जब कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे से पूछा गया कि गठबंधन का चेहरा कौन होगा, जिसे प्रधानमंत्री पद का चेहरा कहा जा सकता है, तो उन्होंने इसके जवाब में कहा कि इसके लिए 11 सदस्यों वाली एक समन्वय समिति बनाई जा रही है. उन्होंने कहा, “मुंबई में हमारी बैठक होनी है जिसमें यह तय होगा कि 11 सदस्य कौन होंगे, संयोजक कौन होगा. हालांकि यह सब छोटी बातें हैं. हमारा ध्यान देश को बचाने के लिए एक योजना तैयार करने पर है. देश के लोग, “यह है हमारा असली मुद्दा.”

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