Explainer : राज्‍यसभा के मनोनीत सदस्यों को किन मामलों में वोटिंग का अधिकार होता है, किनमें नहीं

हाइलाइट्स

राज्‍यसभा के मनोनीति सदस्‍यों को चुने हुए सांसदों के समान शक्तियां व सुविधाएं मिलती हैं.
संसद के उच्‍च सदन के मनोनीति सदस्‍यों को उप-राष्‍ट्रपति चुनाव में वोटिंग का अधिकार है.
राज्‍यसभा में कुछ क्षेत्र विशेष के विशेषज्ञों और दिग्‍गजों का मनोनयन करने का प्रावधान है.

Rajya Sabha Election: संसद के उच्‍च सदन यानी राज्‍यसभा के लिए नामांकन वापस लेने का आखिरी दिन 17 जुलाई 2023 यानी सोमवार था. सोमवार को साफ हो गया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर समेत बीजेपी के दो अन्‍य उम्मीदवार केसरीदेव सिंह झाला और बाबू देसाई गुजरात से निर्विरोध राज्यसभा पहुंच गए हैं. वहीं, तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन, साकेत गोखले समेत 11 नेताओं का राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा था. पश्चिम बंगाल में डेरेक-ओ-ब्रायन समेत टीएमसी के 6 प्रत्‍याशी और बीजेपी का एक उम्मीदवार निर्विरोध चुना गया है. इसके बाद राज्यसभा में बीजेपी के सदस्यों की संख्या 93 हो गई है. तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की एक सीट पर हुए उपचुनाव में जीत दर्ज कर ली है.

कांग्रेस को एक सीट का नुकसान हुआ है. इससे राज्यसभा में कांग्रेस के 30 सदस्य रह जाएंगे. बता दें कि 245 सदस्यीय राज्यसभा में 7 सीटें 24 जुलाई के बाद खाली हो जाएंगी. जम्मू-कश्मीर में चार सीटें, दो नामित और उत्तर प्रदेश में एक खाली सीट के साथ राज्यसभा में कुल सीटें घटकर 238 रह जाएंगी. ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 120 हो जाएगा. भाजपा और उसके सहयोगियों के पास 105 सदस्य होंगे. भाजपा को 5 मनोनीत और 2 निर्दलीय सांसदों का समर्थन मिलना भी तय माना जा रहा है. इसलिए सरकार के पक्ष में सदस्यों की संख्या 112 हो जाएगी, जो बहुमत के आंकड़े से 8 कम है.

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सदस्‍यों के मनोनयन का क्‍या है मकसद
भाजपा कई मनोनीत सदस्‍यों के अपने पक्ष में होने का दावा कर रही है. आइए जान लेते हैं कि कुछ सदस्‍यों का मनोनयन क्‍यों होता है? उन्‍हें किन मामलों में वोटिंग का अधिकार होता है और किनमें नहीं. बता दें कि आमतौर पर राज्यसभा में जो सदस्य मनोनीत किये जाते हैं, वे सभी किसी क्षेत्र विशेष के विशेषज्ञ होते हैं. राज्यसभा सदस्‍यों के मनोनयन के पीछे संवैधानिक अवधारणा रही है कि ऐसे लोग जब उच्‍च सदन में आएंगे तो अपने ज्ञान और अनुभव से विधायी कार्यों में अहम भूमिका निभाएंगे. राज्यसभा में राष्ट्रपति 12 सीटों पर मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति करते हैं.

राज्‍यसभा में बीजेपी अभी बहुमत के आंकड़े से 8 कम है. वहीं, कांग्रेस को एक और सीट का नुकसान हो गया है.

किन मामलों में है वोटिंग का अधिकार
हाल फिलहाल में राज्‍यसभा के मनोनीत सदस्‍यों में से ज्यादातर के बारे में कहा जाता रहा है कि उनकी दिलचस्पी उच्‍च सदन की कार्यवाहियों में कम ही रही है. यही नहीं, उनकी उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं. मनोनीत सदस्‍य राज्‍यसभा के विधायी कार्यों और बहस में भी हिस्सा लेते नहीं दिखते हैं. फिर भी मनोनीत सदस्यों को उप-राष्ट्रपति के चुनाव में वोटिंग का अधिकार मिलता है. लेकिन, वे राष्‍ट्रपति चुनाव में किसी तरह से हिस्सा नहीं ले सकते हैं. बता दें कि संविधान के अनुच्‍छेद-80 के तहत राष्‍ट्रपति के जरिये राज्‍यसभा में 12 सदस्‍यों का मनोनयन होता है.

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क्‍या कहता है अनुच्‍छेद-80 का क्‍लॉज-3
संविधान के अनुच्‍छेद-80 का क्लॉज-3 कहता है कि राज्यसभा में 12 सदस्यों की नियुक्ति अगर मनोनयन के जरिये होगी तो चुने हुए सदस्‍यों की संख्‍या 238 से ज्यादा नहीं हो सकती है. ये लोग विशेष क्षेत्रों के विशेषज्ञ या उसमें काम करने वाले दिग्‍गज लोग होते हैं. अमूमन मनोनीत सदस्‍य साहित्य, कला, समाज सेवा और राजनीति से जुड़े क्षेत्रों के दिग्‍गज लोग होते हैं. इसके पीछे संविधान तैयार करने वालों की अवधारणा रही कि राजनीतिज्ञों के अलावा विशेषज्ञ और बड़ी हस्तियों को राज्यसभा में पहुंचने का कोई जरिया होना चाहिए.

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मनोनीत सदस्‍य और पार्टी की सदस्‍यता
राज्‍यसभा के मनोनीत सदस्‍य चाहें तो किसी राजनीतिक दल की सदस्‍यता ले सकते हैं. उन्हें मनोनयन के छह महीने के भीतर ही किसी पार्टी की सदस्‍यता लेनी होती है. आमतौर पर बहुत कम मनोनीत सदस्य ही किसी सियासी दल की मेंबरशिप लेते हैं. ज्‍यादातर मनोनीत सदस्‍य सरकार के भरोसे के लोग होते हैं. उनके पास वही अधिकार और सुविधाएं होती हैं, जो लोकसभा या राज्यसभा में चुनकर आए सदस्‍यों को दी जाती हैं.

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राज्‍यसभा के मनोनीत सदस्‍य चाहें तो किसी राजनीतिक दल की सदस्‍यता ले सकते हैं.

कहां से लिया गया मनोनयन का प्रावधान
संविधान के प्रारूप को तैयार करने वाली समिति के सदस्य एन. गोपालस्वामी अय्यंगर का कहना था कि हमें ऐसे लोगों को मौका देना चाहिए, जो राजनीति का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन देश के विकास में उनका बड़ा योगदान रहा है. अगर ऐसे लोग उच्‍च सदन में पहुंचेंगे तो उनके ज्ञान और अनुभव का फायदा मिलेगा. संसदीय वास्तुकला में मनोनीत सदस्यों की उपस्थिति भारतीय समाज को ज्‍यादा समावेशी बनाने वाली व्यवस्था का समर्थन करती है. राज्यसभा के लिये सदस्यों का मनोनयन संबंधी प्रावधान आयरलैंड के संविधान से लिया गया है.

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