Opinion: चीन की चुनौतियों को चित करके दुनिया के बाज़ार में बढ़ता भारतीय दखल

कुछ ही दिन पहले मशहूर अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जिस तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जल्द ही जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ देगा. वही IMF की रिपोर्ट के भी मुताबिक 2027 तक 5.4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन कर भारत जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा. देखा जाए तो अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अब भारत का सबसे बड़ा मुकाबला चीन के साथ है लेकिन इस मोर्चे पर भी मोदी सरकार को एक बड़ी सफलता मिली है.

दुनिया भर में निवेश का अध्ययन करने वाली वैश्विक निवेश मैनेजमेंट फर्म ‘इन्वेस्को’ की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत आज निवेश का सबसे आकर्षक उभरता हुआ बाजार बन गया है. रिपोर्ट के मुताबिक राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत सुधार, ईज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस, सरल व्यापार, डेमोग्राफी और निवेशकों के लिए दोस्ताना माहौल के चलते भारत की छवि काफी अच्छी हुई है. आज निवेशक व्यापार बढ़ाने के लिए भारत को सकारात्मक केंद्र के तौर पर देख रहे हैं और लगातार आगे बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था में उनका भरोसा बढ़ा है.

भारत ने भी कमर कस ली है और एक तरफ सरकार ने नीतिगत सुधार किये हैं तो दूसरी तरफ कंपनियों ने भी उत्पादन में जोर लगाना शुरू कर दिया है जिसके सकारात्मक परिणाम भी मिलने लगे हैं. मसलन मोदी सरकार ने पूरी तरह से तैयार वियरलेबल आइटम्स जैसे ईयरबड्स, स्मार्टवॉच के इम्पोर्ट पर 20% बेसिक कस्टम ड्यूटी लगा दी, जिस कारण कंपनियों ने चीन से मंगाने के बजाय मैन्यूफैक्चरिंग को भारत में ही शिफ्ट कर दिया. आज हाल ये है कि चीन की कई फैक्ट्रियों के पास काम नहीं है और कई तो बंद भी हो चुकी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल चीन को पछाड़कर भारत दुनिया में वियरेबल्स का सबसे बड़ा मार्केट बन गया है. माना जा रहा है कि 2023 में भारतीय शिपमेंट 13.1 करोड़ पहुंच सकता है जो पिछले साल 10 करोड़ था जबकि अभी चीन के शिपमेंट में 4% की गिरावट दर्ज की गयी है.

मोदी सरकार के नीतिगत सुधारों चलते भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था तो बना ही साथ ही कारोबार में बढ़त के चलते रोजगार के भी मोर्चे पर भारत की स्थिति बेहतर हो रही है. स्किल इंडिया कार्यक्रम युवाओं को रोजगार परक शिक्षा दे रहा है और उनकी ट्रेनिंग मार्केट की ज़रूरतों के हिसाब से हो रही है. भारत की बढ़ती जनसँख्या भारत को बड़ा मार्केट बना रही है जबकि सरल आर्थिक सुधार और कुशल युवा संसाधनों के चलते सस्ते उत्पादन के लिए भी दुनिया भारत की ओर आकर्षित हो रही है. इसी कारण सबसे कम मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट वाले देशों की लिस्ट में भारत दुनिया में नंबर वन हो गया।

लेकिन भारत की ये राह आसान नहीं होने वाली. गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2075 में भारत 52.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन कर दुनिया में नंबर दो का रुतबा हासिल कर लेगा लेकिन तब तक 57 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ चीन विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्था बन सकता है. वहीं अमेरिका 51.5 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर खिसक जाएगा. इसीलिए बेहद आवश्यक है कि अर्थव्यवस्था की रफ़्तार और निवेशकों का भरोसा बना रहे. लगातार शेयर बाजार में तेजी और और म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने वालों की संख्या में इजाफा होने के साथ ही डीमैट अकाउंट की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. इन छोटे निवेशकों की की हिस्सेदारी बढ़ने भारत की विदेशी निवेशकों पर निर्भरता घटेगी और अर्थव्यवस्था में स्थायित्व आएगा.

अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार रोज़गार है. ख़बरों के मुताबिक मोदी सरकार का सातवां रोजगार मेला इस महीने की 22 तारीख को लगेगा जिसमें 22 से ज्यादा राज्यों की 45 जगहों पर कार्यक्रम आयोजित होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रें सिंग के जरिए युवाओं से जुड़ेंगे और 70,126 युवाओं को नियुक्ति पत्र बांटेंगे. देशभर से चुनी गई नई भर्तियां विभिन्न सरकारी विभागों में शामिल होंगी. इनमें वित्तीय सेवा विभाग, डाक विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, रक्षा आदि शामिल हैं.

खास बात ये है कि भारत की अर्थव्यवस्था उस वक़्त आगे बढ़ रही है जब पूरी दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध और कोरोना महामारी काल में मंदी का शिकार हो रही है. मोदी सरकार की नीतियों के कारण नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन मौजूदा वित्त वर्ष 2023-24 में 17 जून तक 11.18 प्रतिशत बढ़कर 3.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है. केवल मई महीने में जीएसटी संग्रह 1.61 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया जो मई 2022 के जीएसटी संग्रह से लगभग 12% ज्यादा है. आज यूरोप हो या अमेरिका हर जगह आर्थिक संकट है जबकि भारत की साख मजबूत हुई है और वो चीन को ना केवल चुनौती दे रहा है बल्कि चित भी कर रहा है.

(डिस्‍क्‍लेमर- ये लेखक निजी विचार हैं)

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