मानसून क्यों उत्तर भारत में दिखा रहा विकराल रूप? दिल्ली में जुलाई की बारिश ने तोड़ा 41 सालों का रिकॉर्ड

नई दिल्ली. उत्तर भारत में पिछले 24 घंटे की अवधि के दौरान 200 मिलीमीटर (मिमी) से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिस वजह से जम्मू-कश्मीर से लेकर हरियाणा तक कई राज्य लगातार दूसरे दिन रेड अलर्ट पर हैं. दिल्ली में रविवार सुबह साढ़े आठ बजे तक पिछले 24 घंटे की अवधि में 153 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जो 41 सालोंमें जुलाई में एक दिन में हुई सबसे अधिक बारिश है.

भारी बारिश ने जहां शुरुआत लोगों को गर्मी और उमस से निजात दिलाई, अब वही पहाड़ी राज्यों में विनाशकारी हो गई है और नदियाँ उफान पर हैं, जिससे अचानक बाढ़ और भूस्खलन हो रहा है. स्थानीय बाढ़ के कारण कुछ मार्ग बंद हो गए हैं और पर्यटकों के लिए सलाह जारी की गई है, जबकि मैदानी इलाकों के शहर यातायात संकट से जूझ रहे हैं.

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी हवाओं के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में मूसलाधार बारिश और दिल्ली में मौसम की पहली भारी बारिश हुई है. दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए जुलाई में देश में भारी बारिश होना सामान्य बात है, लेकिन तीव्र पश्चिमी विक्षोभ ने वर्षा की गतिविधि को और मजबूत कर दिया है. ये भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उत्पन्न होने वाली वर्षा प्रणालियाँ हैं, जो पश्चिमी हिमालय को प्रभावित करती हैं और बारिश का कारण बनती हैं.

वर्षा गतिविधि अब पूर्व की ओर बढ़ रही है
भारी बारिश जारी रहने के कारण जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के कुछ हिस्से रविवार को रेड अलर्ट पर रहे. शनिवार को चंडीगढ़ में 302 मिमी बारिश हुई, जबकि अंबाला (हरियाणा) में 220 मिमी, ऊना (हिमाचल प्रदेश) में 160 मिमी और धर्मशाला, मनाली (एचपी) एवं भद्रवाह (जम्मू-कश्मीर) में 120 मिमी से अधिक बारिश हुई.

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