Success Story: IIM का यह कॉलेज क्यों है खास? एडमिशन पाने के लिए 10 साल तक किया इंतजार, छठीं बार में मिली सफलता

सफलता की कहानी: अगर किसी भी चीज को पाने की जुनून है, तो उसे पूरा होने में कोई भी रोड़ा नहीं बन सकता है. फिर चाहे आगे बढ़ने में कई असफलताओं का सामना क्यों न करना पड़े? आखिरकार सफलता मिलती ही है. ऐसे ही कहानी है ओडिशा के द्विबेश नाथ (Dwibesh Nath) की. 33 वर्षीय द्विबेश नाथ ने अपने सपनों के कॉलेज भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) में एडमिशन पाने के लिए लगभग एक दशक तक इंतजार किया. नौ वर्षों तक प्रयास करने के बाद द्विबेश अब IIM Ahmedabad में एक्जीक्यूटिव के PGPX-पोस्ट ग्रेजुएशन प्रोग्राम का छात्र है.

वह पहली बार 2014 में कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) के लिए उपस्थित हुए और तीन बार परीक्षा के लिए आवेदन करना जारी रखा. यहां तक कि उन्होंने संस्थान में सीट हासिल करने की उम्मीद के साथ छह बार ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन टेस्ट (GMAT) भी दिया और छठी बार में सफल हो गए. हालांकि, अनुभव हासिल करने के लिए नाथ साथ-साथ काम करते रहे. IIM अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) की तैयारी के दौरान वह मारुति सुजुकी में सप्लाई चेन मैनेजर के रूप में काम कर रहे थे. द्विबेश मैकेनिकल इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आते हैं और उन्होंने मारुति सुजुकी में नौकरी भी की. यह नौकरी उनके लिए काफी मददगार साबित हुआ.

उड़िया-माध्यम स्कूल से की पढ़ाई
द्विबेश कक्षा 10वीं तक उड़िया-माध्यम स्कूल में पढ़ाई की और 11वीं कक्षा में अंग्रेजी-माध्यम संस्थान में चले गए. उनका मानना है कि उनकी उड़िया-माध्यम स्कूली शिक्षा भी उनके मैनेजमेंट में एडमिशन की परीक्षा की तैयारी में बाधा बन गई. उन्होंने कहा “मुझे अपनी भाषा में कोई प्रासंगिक संदर्भ पुस्तक नहीं मिली जो CAT या GMAT की तैयारी में मेरी मदद कर सके. इसलिए, मैंने धीरे-धीरे ‘रेन एंड मार्टिन’ के माध्यम से अंग्रेजी की मूल बातें सीखना शुरू कर दिया क्योंकि मुझे पता था कि भाषा मेरी सबसे बड़ी बाधा थी.”

भीड़ में चलने से बचें
नाथ ने कोचिंग सेंटरों से भी दूरी बना ली और आम धारणा के विपरीत कि मैनेजमेंट एंट्रेंस टेस्ट में सफलता पाने के लिए कोचिंग कक्षाओं की आवश्यकता होती है, वह भविष्य के उम्मीदवारों को सेल्फ स्टडी पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते हैं. द्विबेश आगे बताया कि मैंने कोचिंग कक्षाएं और विभिन्न तरीके आज़माए, लेकिन इससे मदद नहीं मिली. मुझे जल्द ही एहसास हुआ कि भीड़ में चलने से कोई मदद नहीं मिलेगी क्योंकि मेरी पृष्ठभूमि बाकियों से अलग है. तैयारी के पुराने तरीकों में मैं प्रश्न/उत्तर या लेख देख रहा था और सोच रहा था कि व्याकरण इसी तरह बनाना है, लेकिन मेरी मूल बातें स्पष्ट नहीं थीं. इसलिए, मैंने पहले बुनियादी बातों को समझने और फिर सवालों के जवाब देने पर ध्यान केंद्रित करने का एक अलग तरीका आजमाया.

IIM Ahmedabad की ये है खासियत
नाथ बताते हैं कि IIM A में उनका अनुभव उन्हें नए स्किल सिखा रहा है, चाहे वह शैक्षणिक हो या गैर-शैक्षणिक. उन्होंने कहा कि इस अनुभव के कारण मैं इतना फ्लेक्सिबल और आश्वस्त हो गया हूं कि मुझे पता है कि अगर मुझे किसी विफलता का सामना करना पड़ता है, तो भी मैं उससे सीख लूंगा और अपने अगले प्रयास में अपने लाभ के लिए उनका उपयोग करूंगा. उनका मानना है कि IIM Ahmedabad एडमिशन की प्रक्रिया ने उनके अंदर जोखिम लेने की प्रवृत्ति पैदा की है, जो उन्हें अपनी असफलताओं को सकारात्मक सबक में बदलने में मदद करती है. मैं दुनिया भर में छँटनी की खबरों से परेशान नहीं हूँ. IIM Ahmedabad ने मुझे वे स्किल दिए हैं, जो भविष्य में जरूरत पड़ने पर मुझे अपनी कंपनी स्थापित करने में भी मदद कर सकते हैं.

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