शिव गृहस्‍थ होने के बाद भी श्‍मशान में क्‍यों रहते हैं, क्‍या इसमें छुपा है जीवन प्रबंधन का कोई सूत्र

श्मशान में रहते हैं शिव: सनातन धर्म में सावन के पवित्र माह को भगवान शिव का महीना माना जाता है. इस बार अधिकमास के कारण सावन माह अंग्रेजी कैलैंडर के मुताबिक लगातार दो महीने का है यानी इस बार सावन में 4 के बजाय 8 सोमवार पड़ेंगे. अभी सावन का महीना चल रहा है. इस महीने लोग पूरे मनोयोग से शिव की आराधना करते हैं. शिव के अलग-अलग स्‍वरूपों की इस महीने पूजा की जाती है. शिव अपने कई स्‍वरूपों में एक श्‍मशान के देवता भी हैं. वह गृहस्‍थ हैं, लेकिन श्‍मशान में निवास करते हैं. आखिर ऐसा क्‍यों है कि शिव श्‍मशान में रहते हैं. इससे वह संसार को क्‍या संदेश देना चाहते हैं? जानते हैं आपके मन में आए ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब.

सनातन धर्म में भगवान शिव को सबसे रहस्यमयी देवता माना गया है. उनकी वेश-भूषा ब्रह्मदेव और भगवान विष्‍णु से बिलकुल अलग है. शिव पुराण के अनुसार, गृहस्‍थ शिवजी के परिवार में माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय जी और नंदी शामिल हैं. गृहस्थ होते हुए भी उनका स्वरूप एकदम उलटा है. जहां, वह कैलाश पर सपरिवार रहने के कारण कैलाशपति कहलाते हैं. वहीं, श्मशान के एकांत में रहने के कारण उन्‍हें श्‍मशान का देवता भी कहा जाता है. वह कीमती वस्‍त्र और आभूषणों के बजाय विता की भस्‍म धारण करते हैं.

ये भी पढ़ें – क्या हैं शिव के वो प्रतीक, जो उन्होंने धारण किये हैं, क्‍या हैं उनके मायने

सांसारिक होकर भी श्‍मशान में क्‍यों रहते हैं शिव
सबसे पहले समझते हैं कि भगवान शिव श्‍मशान में क्‍यों रहते हैं? शिवजी को सामान्‍य तौर पर परिवार का देवता कहा जाता है. इसलिए ज्‍यादातर गृहस्‍थ लोग शिव परिवार की प्रतिमाएं या तस्‍वीरें अपने पूजाघरों में रखते हैं. लेकिन, वे सांसारिक होते हुए भी श्मशान में रहते हैं. दरअसल, पूरा संसार या आपका परिवार मोह-माया का प्रतीक है. वहीं, श्‍मशान वैराग्‍य का प्रतीक माना जाता है. अगर आप किसी के अंतिम संस्‍कार में शामिल होने के लिए श्‍मशान गए होंगे तो आपने ये जरूर सोचा होगा कि जिंदगी भर की भागदौड़ का अंत ये है. सनातन धर्म में इस सोच को क्षणिक वैराग्‍य कहा गया है. भगवान शिव के श्‍मशान में रहने के पीछे हर प्राणी के जीवन प्रबंधन का सूत्र छुपा है.

भगवान शिव का गृहस्‍थ होकर भी श्‍मशान में रहना बताता है कि जीवन में हर कर्तव्‍य को वैराग्‍य के भाव के साथ पूरी निष्‍ठा से निभाएं.

श्‍मशान में रहने के पीछे छुपा है जीवन का मंत्र
भगवान शिव का गृहस्‍थ होते हुए भी श्‍मशान में रहना बताता है कि हर व्‍यक्ति को संसार में रहते हुए अपने हर कर्तव्य को पूरी निष्‍ठा के साथ निभाना चाहिए. लेकिन, इसके लिए मोह-माया में बंधे रहना जरूरी नहीं है. आसान भाषा में कहें तो शिव का ये स्‍वरूप शिक्षा देता है कि जीवन में सबकुछ करते हुए भी मन और आत्‍मा से वैराग्‍य को धारण करना चाहिए. ये संसार नश्‍वर है. इसलिए, आपके जीवन में मौजूद हर चीज एक दिन नष्‍ट हो जाएगी. इसलिए संसार में रहते हुए भी किसी से मोह नहीं रखना चाहिए. इंसान को किसी भी सुख या चीज से मोह नहीं रखना चाहिए. इसमें एक और सीख छुपी है कि अच्‍छी और खराब परिस्थितियों में व्‍यक्ति को समभाव रहना चाहिए.

ये भी पढ़ें – क्या है शिव की तीसरी आंख, अगर ये खुल गई तो क्या होगा, क्या है इसका रहस्य

श्‍मशान में रहने के पीछे क्‍या है धार्मिक मान्‍यता
शिव के श्‍मशान में रहने को लेकर धार्मिक मान्‍यता भी है. दरअसल, सनातन धर्म में शिवजी को सृष्टि का संहारक माना गया है. मान्यताओं के अनुसार, ये सृष्टि बनती और बिगड़ती रहती है. भगवान ब्रह्मा सृष्टि की रचना करते हैं. भगवान विष्णु सृष्टि का पालन करते हैं. वहीं, भगवान शिव कलियुग का अंत होने पर सृष्टि का संहार करते हैं. वहीं, हम सभी जानते हैं कि श्मशान में जीवन का अंत होता है. वहां सबकुछ भस्म हो जाता है. इसीलिए शिवजी का निवास ऐसी जगह है, जहां मानव शरीर, उस शरीर से जुड़े सभी रिश्ते, हर मोह और सभी तरह के बंधन खत्म हो जाते हैं. जीवों की मृत्यु के बाद आत्मा शिव में ही समा जाती है. इसलिए शिव श्‍मशान में वास करते हैं और श्‍मशान के देव कहलाते हैं.

ये भी पढ़ें – कौन थे भगवान शिव के ससुर, क्यों महादेव से नहीं थे उनके अच्छे रिश्ते

चिता की भस्‍म ही क्‍यों धारण करते हैं महादेव
आपने कभी सोचा है कि महादेव अपने शरीर पर भस्म ही क्‍यों लगाते हैं? वह भी किसी लकड़ी की भस्म नहीं, बल्कि चिता की भस्‍म ही क्‍यों लगाते हैं? धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव को मृत्यु का स्वामी माना गया है. उनके अनुसार शरीर नश्‍वर है और एक दिन जलकर भस्म में बदल जाएगा. जीवन के इसी पड़ाव का भगवान शिव सम्मान करते हैं. इस सम्मान को वो अपने शरीर पर भस्म लगाकर प्रकट करते हैं. इससे हमें ये संदेश भी मिलता है कि इस शरीर पर गर्व नहीं करना चाहिए. सुंदर से सुंदर व्यक्ति भी मृत्यु के बाद भस्म बन जाएगा. वहीं, शिव भस्‍म को लगाकर उसकी पवित्रता को सम्मान देते हैं. माना जाता है कि शव को जलाने के बाद बची हुई राख में उसके दुख, सुख, बुराई, अच्छाई भस्‍म हो जाती हैं. इसलिए चिता की भस्‍म को शिव पवित्र मानकर धारण करते हैं.

Stories of Lord Shiva, Lord Shiva, Shiva live in crematorium, Shiva is a householder, formula of life management, Shiv Parvati, Saavan Somavar, Auspicious Month, भगवान शिव की कहानियां, श्‍मशान में क्‍यों रहते हैं शिव, शिव की कितनी बेटियां थीं, भगवान शिव के कितने बेटे थे, भगवान शिव और सावन, सावन सोमवार, 2023 में सावन के कितने सोमवार हैं

शिव पुराण के मुताबिक, भगवान शिव के परिवार में माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय जी और नंदीजी हैं.

भस्‍म लगाकर क्‍या संदेश दे रहे भगवान शिव
अघोरी, सन्यासी और कई साधु अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं. क्या इसके पीछे कोई विज्ञान भी है? दरअसल, भस्म हमारे शरीर के रोम छिद्रों को बंद कर देती है. भस्‍म को शरीर पर लगाने से गर्मी में गर्मी और सर्दी में सर्दी नहीं लगती है. इस तरह भस्म धारण करने वाले शिव यह संदेश भी देते हैं कि परिस्थितियों के अनुसार अपने आपको ढालना सबसे बड़ा गुण है. वहीं, एक कथा भी प्रचलित है कि जब भगवान शिव और माता सति को यज्ञ के लिए निमंत्रण नहीं मिलने पर सति ने क्रोध में आकर खुद को अग्नि के हवाले कर दिया था तो भगवान शिव उनका शव लेकर धरती से आकाश तक हर जगह घूमे. विष्णु जी भगवान शिव की ये दशा देख नहीं पाए और माता सति के शव को छूकर उन्होंने उसे भस्म में बदल दिया. इसके बाद शिवजी ने माता सति को याद कर वही राख अपने शरीर पर लगा ली.

** (सावन के महीने में हम आपको भगवान शिव से जुड़ी कुछ कहानियां और ज्ञानप्रद जानकारियां देते रहेंगे. इस श्रृंखला की चौथी कड़ी के तहत हम बता रहे हैं कि भगवान शिव के श्‍मशान में रहने और भस्‍म लपेटे रहने के रहस्‍यों के बारे में.)

टैग: Dharma Aastha, Dharma Granth, हिंदू, भगवान शिव, Mahashivratri, धार्मिक स्थल, शिव मंदिर

Source link

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*