How to reduce Uric Acid: ये 3 पत्ते यूरिक एसिड के लिए बनेंगें काल, खून में ही सूख जाएगा यह, दवा की भी नहीं होगी जरूरत

हाइलाइट्स

कालमेघ के पत्ते में एंटी-इंफ्लामेटरी और इम्यूनोस्टिमुलेटरी गुण पाया जाता है.
अध्ययन में पाया गया कि गिलोय के पत्ते से तैयार जूस गठिया के दर्द में रामबाण है.

पत्तियां जो यूरिक एसिड को नियंत्रित करती हैं: गठिया बेहद खराब बीमारी है जिसमें जोड़ों में बेपनाह दर्द होता है. यह शरीर में यूरिक एसिड के बढ़ने से होता है. भोजन से प्राप्त प्रोटीन जब शरीर में टूटता है तो इसके बाय-प्रोडक्ट के रूप में प्यूरिन का निर्माण होता है. यह प्यूरिन जब टूटता है तो यूरिक एसिड बनता है. पर यूरिक एसिड किडनी से होते हुए पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाता है. लेकिन जब जरूरत से ज्यादा प्यूरिन शरीर में बनने लगे तो किडनी इसे बाहर निकालने में सक्षम नहीं हो पाती है. यही यूरिक एसिड क्रिस्टल के रूप में जोड़ों के बीच में जमा होने लगता है और सूजन बना देता है.

शरीर में यूरिक एसिड ज्यादा होने पर शरीर का अंग-अंग दर्द करने लगता है. यह सिर्फ जोड़ों को ही नहीं, कई अंगों को प्रभावित करता है. जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा 7 mg/dL से ज्यादा हो जाए तो कई दर्दनाक संकेत देखने को मिलते हैं. इसके बाद डॉक्टर के पास जाना जरूरी हो जाता है. हालांकि अगर पहले से कुछ पत्तों का सेवन किया जाए तो यूरिक एसिड को घर पर बिना किसी खर्च के कंट्रोल किया जा सकता है.

इन पत्तों से कंट्रोल होगा यूरिक एसिड

1.कालमेघ पत्ते-एनसीबीआई की खबर के मुताबिक कालमेघ के पत्ते में एंटी-इंफ्लामेटरी और इम्यूनोस्टिमुलेटरी गुण पाया जाता है. अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कालमेघ के पत्ते गठिया के दर्द में बहुत आराम पहुंचा सकता है. अध्ययन में पाया गया है कि कालमेघ के पत्तों में एंटीहायपरयूरेसेमिक गुण मौजूद है यानी यह यूरिक एसिड को कम करता है. एंटी-इंफ्लामेटरी गुण के कारण यह सूजन को कम करता है. यह मोनसोडियम यूरेट क्रिस्टल को गला देता है.

2. अमरूद के पत्ते-एनसीबीआई जर्नल के मुताबिक अध्ययन में पाया गया कि अमरूद के पत्तों में पोलीफेनॉल कंपाउड पाया जाता है कि गठिया और हाई बीपी के लिए जिम्मेदार केमिकल को बनने से रोक देता है. यह यूरिक एसिड को कम करता है जिससे हाइपरटेंशन का जोखिम भी कम हो जाता है. अध्ययन में अमरूद के पत्तों से अर्क तैयार किया गया और इसे गठिया से पीड़ित चूहों में दिया गया. कुछ दिनों के बाद देखा गया कि चूहों में यूरिक एसिड और हाइपरटेंशन दोनों का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिर गया.

3. गिलोय-आयुर्वेद में गिलोय का इस्तेमाल कई बीमारियों को दूर करने में किया जाता है. हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक एक अध्ययन में पाया गया कि गिलोय के पत्ते से तैयार जूस गठिया के दर्द में रामबाण है. इससे गठिया का दर्द बहुत जल्द कम हो जाता है. गिलोए को पत्ते को अगर चबाएंगे तो इशसे भी जूस निकलेगा. सुबह-सुबह गिलोय के पत्ते को चबाने से यूरिक एसिड बहुत कम हो जाता है. गिलोय में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होता है और पेन रिलीवर होता है.

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