Vedha Review: वेधा में मिलता KGF, Kantara और Pushpa का इफेक्ट्स, महिलाएं जरूर देखें शिवा राजकुमार की ये फिल्म

शिवा राजकुमार (Shiva Rajkumar) की नई फिल्म वेधा (Vedha) रिलीज हुई है जो महिलाओं की शक्ति को बढ़ाने का एक खास मैसेज देती है. शिव राजकुमार कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के एक प्रतिष्ठित हीरो हैं और ए हर्षा द्वारा निर्देशित वेधा साबित करती है कि 60 वर्षीय अभिनेता के पास अभी भी अपने प्रशंसकों को लुभाने की काबिलियत है. फिल्म की कहानी सार्वजनिक परिवहन (Public transport) पर एक युवा महिला को एक पुरुष द्वारा परेशान (Harassed) किए जाने से शुरू होती है. वो घर आती है और अपनी दादी से शिकायत करती है, फिर उसे वेद (Shiva Rajkumar) की कहानी पढ़ने कहा जाता है, तब फिल्म बीती घटना को बयां करती है.

फिल्म की कहानी

निर्देशक ए हर्षा (Director A Harsha) 1960 के दशक में जाते हैं, जहां हम एक युवा वेद को देखते हैं. इसके बाद 1980 के दशक में पुष्पा (Ganavi Laxman) से उसकी शादी कैसे होती है, जहां हम वेद और उसकी बेटी कनका (अदिति सागर) को देखते हैं, जो बदले की हत्या कर रही है. ऐसा लगता है कि पिता और बेटी बदला लेने के इस नाटक में एक निश्चित समूह के लोगों की तलाश में हैं और एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं. कहानी में जहां पुलिस इंस्पेक्टर रामा (Veena Ponappa) उनका पीछा कर रही है, वहीं परी (Shweta Chengappa) एक यौनकर्मी, वेधा के दोस्त (Raghu Shimoga) को मारने पर आमादा है. पुष्पा को क्या हुआ? वेद और कनक इन आदमियों को क्यों मार रहे हैं? यही सब वारदातें इसे पर्दे पर बयां करती हैं.

महिला सशक्तिकरण पर जोर देती है वेधा

शिवा राजकुमार ने निर्देशक हर्षा के साथ इससे पहले तीन फिल्मों में काम किया था और उनकी यह 125वीं फिल्म दोनों के लिए मील का पत्थर है. वेधा को हर्षा द्वारा काफी सोच समझकर स्मार्टली तरीके से लिखा गया है ताकि पूरी फिल्म में दर्शकों को बांधे रखा जा सके. फिल्म में जहां एक्शन है, वहीं बहुत सारी सेंटीमेंट्स भी हैं और वो वेद को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखाना पसंद करता है जो महिला सशक्तिकरण (women empowerment) में विश्वास करता है और महिलाओं के अधिकारों (women’s rights) के लिए खड़ा होता है. ऐसे में ये फिल्म निश्चित तौर पर शिवा राजकुमार के प्रशंसकों को पसंद आएगी, क्योंकि कन्नड़ स्टार ऐसी कहानियों का चयन कर रहे हैं जो समाज के लिए अधिक मायने रखती हैं. शायद वो अपने करियर के इस मोड़ पर डायरेक्शन बदल रहे हैं.

वेधा में शानदार और जानदार हैं महिलाओं के किरदार

इस फिल्म में सभी महिलाओं के किरदार प्रदर्शन-उन्मुख यानी स्ट्रांग परफोर्मेंस ओरिएंटेड हैं. वेधा में महिलाओं को अपनी ताकत दिखाने पर जोर देती है. इसमें श्वेता चेंगप्पा (Shwetha Chengappa), वीना पोनप्पा (Veena Ponappa), उमाश्री (Umashree), गणवी लक्ष्मण (Ganavi Laxman) और अदिति सागर (Aditi Sagar) हैं, जो इस फिल्म में अपनी-अपनी भूमिकाओं में चमकते हैं.

वेधा में दिखा KGF, Kantara और Pushpa का इफेक्ट

कहा जा रहा है कि फिल्म में केजीएफ 2 के कुछ शेड्स हैं जिस तरह से इसे शूट किया गया है. इसमें खदान चलाने वाला डॉन रॉकी भाई की तरह दिखता है और कुछ दृश्यों में धार्मिक पहलू का समावेश हमें कांतारा की याद दिलाता है. एक यह भी आश्चर्य करता है कि क्या वेधा की पत्नी का नाम पुष्पा है और पुष्पा टाइटल वाला सॉन्ग अल्लू अर्जुन की Pushpa: the Rise वाला इफेक्ट भी है. इन सब सीन्स के जरिए शायद निर्देशक द्वारा उन सफल फिल्मों के लिए इशारा था.

खामियां कम प्लस प्वाइंट ज्यादा रखती है वेधा

वेधा में अपनी खामियां हैं, लेकिन जब इसकी मंशा और फिल्म में अभिनेत्रियों के प्रदर्शन की तुलना की जाती है, तो उन्हें अनदेखा किया जा सकता है. स्वामी जे गौड़ा (Swami J Gowda) की सिनेमैटोग्राफी शानदार है और अर्जुन ज्ञान (Arjun Janya) का म्यूजिक भी फिल्म का प्लस प्वाइंट है.

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