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जब नर्स‍िंग होम में पड़ा छापा… जबरदस्ती खुलवाया गया एक कमरे का दरवाजा, फ‍िर…

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औरैया. आशा बहू और आशा संगिनी अब निजी नर्सिंग होम में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी कराने के लिए पहुंचने लगी है एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में सामने आया है. जहां सीएससी अधीक्षक ने अपनी छापेमारी के दौरान 7 आशा बहुओं और आशा संगिनियों को पकड़ा है. जिन हालात में आशा बहुओं और आशा संगिनियों को पकड़ा गया है. वह वाकई में हैरतअंगेज नजर आ रहा है.

असल में निजी नर्सिंग होम पर छापेमारी के वक्त सभी आशा बहुए या फिर आशा संगिनी अपने आप को स्वास्थ्य अधिकारियों की पकड़ से बचाने के लिए एक कमरे में जाकर के बंद हो गई और तखत के नीचे जाकर के छुप गई, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम को बहुत ही सही और सटीक सूचना मिली हुई थी, जिसके बाद उन्होंने कोई कोर कसर कोई कोताही नहीं बरती. जबरदस्ती उस रूम का कमरा खुलवाया गया, जिसमें आशा बहुएं और आशा संगिनी छुपी हुई बैठी थी.

औरैया जिले की बिधूना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक अविचल पांडे ने लक्ष्मी नर्सिंग होम में छापेमारी करके 7 आशा बहुओं और आशा संगनियों को पकड़ लिया. वायरल वीडियो में साफ-साफ देखा और सुना जा सकता है कि बिधूना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक अभिषेक पांडे बंद कमरे के बाहर खड़े होकर के यह बोलते हुए दिखाई दे रहे हैं कि कमरा खोलिए एक-एक करके बाहर निकलिए पुलिस बाहर आ गई है. फटाफट बाहर आ जाइए. जैसे ही अविचल पांडे आशा संगिनी सर्वेश का नाम लेते है वैसे गेट खोला जाता है तो आशा बहुए और आशा संगिनी तखत के नीचे छुपी हुई बैठी दिखाई दे रही है. अविचल पांडे जब सर्वेश कुमारी और गुड्डी देवी का नाम पुकारते हैं तो उसके बाद सभी जमीन पर रेंगती हुई धीरे-धीरे करके सभी बाहर आती हैं.

अविचल पांडे आशा बहुएं और आशा संगिनियों की इस भूमिका को देख करके बेहद नाराज नजर आए. उन्होंने कहा कि चाहे कितना भी मुंह छुपा लो लेकिन कोई बच नहीं सकता है वह एक एक सभी को नाम से जानते हैं और पहचानते हैं. ऐसा कहा गया है कि आशा बहुओं और आशा संगिनियों की एक बैठक बिधूना में बुलाई गई थी. उस बैठक में भाग लेने के बाद सभी की सभी लक्ष्मी नर्सिंग होम में जा पहुंची. जब इस बात की सूचना बिधूना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अविचल पांडे को लगी तो उन्होंने मौके पर पहुंच कर के सभी आशा बहुओं और आशा संगिनियों को पकड़ लिया. सभी पर आरोप है कि वह नर्सिंग होम में गर्भवती महिलाओं को ले जा करके उनकी डिलीवरी कराती है और नर्सिंग होम संचालकों प्रबंधकों और डॉक्टरों से प्रति केस के सिलसिले में एकमुश्त रकम हासिल करती है, जिसके बारे में ऐसा कहा जा रहा है कि यह रकम 5000 के आसपास होती है.

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आशा बहुओं और आशा संगिनियों की लक्ष्मी नर्सिंग होम में मौजूदगी को लेकर के स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी को नोटिस जारी किया गया है और सभी से जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है. इस समय जमकर के वायरल हो रहे. इस वीडियो के बारे में ऐसा कहा गया है. यह वीडियो कम से कम 10 दिन पुराना है. जब बिधूना मुख्यालय पर आशा बहुओं और आशा संगिनीयों की एक संयुक्त बैठक हुई जिसके बाद कुछ लक्ष्मी नर्सिंग होम जा पहुंची.

आमतौर पर यह बात प्रचारित है कि जितने भी नर्सिंग होम या फिर अस्पताल संचालक है. वह कहीं ना कहीं आशा बहू और आशा संगिनियों को एक बड़ा लालच इस बात का देते हैं कि गर्भवती महिलाओं को अगर वह डिलीवरी के लिए उनके अस्पताल या नर्सिंग होम में ले करके आयेगी, तो उनको एक मुफ्त कम से कम 5000 प्रति केस प्रदान किया जाएगा. इसी लालच में आशा बहुएं और आशा संगिनी गर्भवती महिलाओं को नर्सिंग होम हो या फिर अस्पतालों में ले करके पहुंचती है, जिसके बाद ऐसा देखा गया है और कहा गया है कि कई दफा गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के दौरान मौत हो जाती है. फिर खासा हंगामा हल्ला मचता है, जिसके बाद नर्सिंग होम संचालक और डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा तक दर्ज होते हैं और कई दफा नर्सिंग होम संचालक और डॉक्टरों को गिरफ्तार करके जेल भी भेजा गया है.

आशा बहू और आशा संगनी का काम मेडिकल अधिकारियों के हाथों को मजबूत करने के साथ साथ गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी सही ढंग से कराने की भूमिका में अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह बखूबी अदा करना, लेकिन इसके बावजूद भी ऐसा देखा जाता है कि चंद पैसों की खातिर यही आशा बहूएं या आशा संगिनी निजी स्वार्थ के चलते निजी नर्सिंग होम में गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी कराने के लिए ले जाती है.

स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई व्यवस्था के अनुक्रम में आशा संगिनी और आशा बहुओं की तैनाती गर्भवती महिलाओं के बेहतरी के लिहाज से की गई है. आशा बहुओं का काम गर्भवती महिला की जानकारी सामने आने के बाद 3 महीने की अवधि से ही टीकाकरण शुरू करा देने से लेकर डिलीवरी कराने तक रहती है. किसी भी सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिला की डिलीवरी कराने के एवज में एक आशा बहू को 600 सरकार की ओर से प्रदान किए जाते हैं. जबकि आशा संगिनियों का काम आशा बहुओं के काम की मॉनिटरिंग करना होता है. एक आशा बहू की तैनाती एक हजार की आबादी वाले गांव में की जाती है. प्रतिमाह आशा बहुओं को प्रोत्साहन राशि 2000 राज्य सरकार ओर 1500 केंद्र सरकार के हिसाब से स्वास्थ्य विभाग प्रदान करता है. जबक‍ि आशा संगिनियों को 7200 राज्य और 1500 केंद्र सरकार की ओर से प्रति माह प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है. एक आशा संगिनी के अधीन 10 से लेकर के 20 आशा बहुओं की मॉनिटरिंग का काम रहता है. इसके बावजूद भी ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं कि आशा बहू है या फिर आशा संगिनी निजी नर्सिंग होम में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी कराने के लिए ले करके पहुंचती हैं जिसके बाद हो, हल्ला, हंगामा होना आम बात बन जाती.

टैग: यूपी खबर

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