सानंदना उपाध्याय/बलिया. बरसात के मौसम में कई बीमारियां लोगों को परेशान करने लगती हैं. इन्हीं में एक खतरनाक बीमारी कालाजार है, जो अधिकतर बालू मक्खी के काटने से फैलती है. इसका एक और रूप है.जिसे चमड़ी वाला कालाजार बोलते हैं. इसके लक्षण में शरीर पर सफेद दाग, गांठे बनना इत्यादि. अभी जनपद के मुरली छपरा में एक चमड़ी वाला कालाजार का मरीज मिला है. विगत वर्षों में 10, 20 या 15 केस आते थे, लेकिन इस बार काफी प्रयास से केवल एक केस रिपोर्ट हुआ है.

जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव ने बताया कि कालाजार एक बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है. यह मक्खी घर की दरारें, कच्चे घर, चूहे के बिल, अंधेरे में और गंदगी में छिपी रहती है. वहीं पर जो लोग खुले बदन, जमीन पर, फर्श पर या बिना मच्छरदानी के सोते हैं, उनको काटती है. इससे लोग बीमार पड़ जाते हैं. इसके लक्षण पेट का बाहर निकलना, हाथ पैर सूजना, लीवर-यकृत पर प्रभाव पड़ना, खून की कमी होना व हिमिया इत्यादि हैं. अगर इलाज में देरी होती हैतो मरीज की मृत्यु भी हो सकती है.

कालाजार बीमारी का दूसरा रूप
इसका एक और रूप है, जिसे चमड़ी वाला कालाजार बोलते हैं. इसके लक्षण में शरीर पर सफेद दाग, गांठे बनना इत्यादि शामिल हैं. दोनों प्रकार के कालाजार के इलाज के लिए जिला अस्पताल में जांच और इलाज मुफ्त है. इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी इसकी जांच की व्यवस्था है और केंद्रों पर चमड़ी वाले कालाजर के इलाज की भी व्यवस्था है. अगर कहीं से भी कालाजार के मरीज आते हैं, तो उस पूरे एरिया में आईआरएस का छिड़काव कराया जाता है. जनपद के मुरली छपरा में एक चमड़ी वाला कालाजार का मरीज मिला है. सतत निगरानी जांच और आईआरएस के व्यवस्था से कालाजार आखिरी चरण में है.

ऐसे करें इस गंभीर बीमारी से बचाव
जिला मलेरिया अधिकारी ने लोगों से अपील की है कि कोई भी खुले बदन न सोएं, क्योंकि जो मुख्य वजह बालू मक्खी होती है, वह जमीन पर ही ज्यादातर रहती है, घरों में फर्श टूटा है तो सही कराएं, दीवारों को 6 फीट पक्की कराएं और मच्छरदानी में ही सोएं. इस प्रकार से कालाजार के बीमारी से बच सकते हैं.

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