आपने भी कई बार अपने आस पास ऐसे खिलाड़ियों को देखा होगा, जो खेल के कारण अपनी पढ़ाई से समझौता कर लेते हैं और फिर कुछ हासिल न होने पर अपने खेल को भी छोड़ देते हैं. ऐसे में वह पढ़ाई में भी पीछे रह जाते हैं.  लेकिन अब किसी  खिलाड़ी को अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं करना पड़ेगा. खिलाड़ी खेल के साथ- साथ अपनी पढ़ाई भी कर सकेगा. इसके लिए खेल मंत्रालय (Union sports ministry ) ने एक बड़ा कदम उठाया है.

मंत्रालय ने नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (National Sports Federations) और स्पोर्ट्स ऑथिरिटी ऑफ इंडिया (Sports Authority of India ) को आदेश दे दिए हैं कि नेशनल कैंप में वह खिलाड़ियों के लिए ट्यूटर की व्यवस्‍था करें. खिलाड़ियों  को बाकी विषयों के साथ मैथ्य, साइंस और इंग्लिश की भी ट्यूशन मिलेगी और इस ट्यूशन के लिए ट्यूटर काे 15 हजार रुपए हर माह मिलेंगे.  मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया है कि ट्यूटर की पूरी तरह से जिम्मेदारी स्पोर्ट्स फेडरेशन या स्पोर्ट्स ऑथिरिटी की होगी.

सर्वे के बाद लिया फैसला

वर्ल्ड कप की तैयारियों के कारण सौरभ चौधरी दसवीं का बोर्ड एग्जाम देने से चूक गए थे

समर सीजन में कैंप 90 दिनों से अधिक के होते हैं और वहीं नॉन समर सीजन में यह कैंप 45 दिन के होते हैं. कैंप के दौरान नेशनल फेडरेशन या स्पोर्ट्स ऑथिरिटी उन खिलाड़ियों के लिए ट्यूशन की व्यवस्‍था करवाएगी, जिन्हें इसकी जरूरत है.

टाइम्स ऑफ इं‌डिया की खबर के अनुसार मंत्रालय ने ट्रेनिंग सेंटर्स, रीजनल सेंटर्स आदि का सर्वे किया और हर जगह सिर्फ एक ही बात सामने आई कि खेल को करियर के रूप में चुनने के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है.

हाल में ही कई खिलाड़ी इसके उदाहरण बने हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश प्रतिनिधित्व करने के कारण एग्जाम देने से चूक गए. पिछले साल एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाले निशानेबाज सौरभ चौधरी वर्ल्ड कप की तैयारियों के कारण दसवीं का बोर्ड एग्जाम देने से रह गए थे. वह वर्ल्ड कप ओलिंपिक क्वालिफाइंग इवेंट था.

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